Saturday, December 12, 2009

जय लोक मंगल: घर अकेला हो गया से एक गज़ल

जय लोक मंगल: घर अकेला हो गया से एक गज़ल

1 Comments:

At February 3, 2010 at 10:23 PM , Blogger arvind said...

तुझे ऐ ज़िन्दगी अब क़ैदख़ाने से गुज़रना है
तुझे मैँ इस लिए दुख-दर्द का आदी बनाता हूँ
------very nice.

 

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